भारत में क्रेडिट कार्ड का ब्याज कैसे लगता है
- ड्यू डेट तक पूरी कुल देय राशि भर दें तो कोई ब्याज नहीं लगता। ख़रीदारी पर लगभग 20 से 50 दिन का ब्याज-मुक्त समय मिलता है।
- कुल से कम भरने पर ज़्यादातर बैंक बाक़ी रक़म पर ब्याज लेते हैं, जो अक्सर हर ख़रीद की तारीख़ से गिना जाता है। बकाया चुकने तक नई ख़रीदारी का ब्याज-मुक्त समय भी ख़त्म हो जाता है।
- ब्याज आम तौर पर हर महीने 3% से 3.75% होता है, यानी साल में 36% से 45%। ब्याज और फ़ीस पर ऊपर से 18% GST लगता है।
- क्रेडिट कार्ड से निकाले गए कैश पर उसी दिन से ब्याज लगता है, साथ में कैश एडवांस फ़ीस भी।
क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल
- हर महीने सिर्फ़ मिनिमम ड्यू नहीं, पूरी कुल देय राशि भरें। पूरी रक़म के लिए ऑटो-पे लगा देने से यह अपने आप होता रहेगा।
- मिनिमम ड्यू कभी न छोड़ें। RBI के नियमों के तहत, ड्यू डेट के 3 दिन से ज़्यादा बाद तक भुगतान न होने पर बैंक लेट फ़ीस लेते हैं और क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करते हैं।
- बकाया अपनी क्रेडिट लिमिट के लगभग 30% से कम रखें। इससे ज़्यादा इस्तेमाल करने पर क्रेडिट स्कोर घट सकता है।
- क्रेडिट कार्ड से कैश न निकालें।
- अगर बड़ा बकाया जमा हो गया है, तो बैंक से उसे EMI में बदलने के बारे में पूछें, या पर्सनल लोन से तुलना करें। दोनों आम तौर पर रिवॉल्विंग क्रेडिट के साल के 36% से 45% से बहुत सस्ते पड़ते हैं। हाँ कहने से पहले प्रोसेसिंग फ़ीस देख लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर मैं सिर्फ़ मिनिमम ड्यू भरूँ तो क्या होगा?
आप लेट फ़ीस और ख़राब क्रेडिट रिपोर्ट से बच जाते हैं, लेकिन बाक़ी रक़म पर ब्याज और GST जुड़ते रहते हैं। क्योंकि बकाया घटने के साथ मिनिमम ड्यू भी घटता है, ₹50,000 का बिल चुकने में कई साल लग सकते हैं। अपना हिसाब देखने के लिए ऊपर अपने आँकड़े डालें।
क्या क्रेडिट कार्ड की EMI मिनिमम ड्यू भरने से सस्ती है?
आम तौर पर हाँ। कार्ड EMI प्लान और पर्सनल लोन आम तौर पर रिवॉल्विंग क्रेडिट से काफ़ी कम ब्याज लेते हैं, लेकिन इनमें प्रोसेसिंग फ़ीस और GST जुड़ता है। बदलने से पहले कुल लागत की तुलना करें।
क्या देर से भुगतान का मेरे CIBIL स्कोर पर असर पड़ता है?
हाँ। बैंक 3 दिन से ज़्यादा देर वाले भुगतान क्रेडिट ब्यूरो को बताते हैं, और यह रिकॉर्ड आपकी रिपोर्ट में बना रहता है।
स्रोत
- भारतीय रिज़र्व बैंक ↗ – नीतिगत रेपो रेट