यह कैसे निकाला जाता है
आपका मासिक ख़र्च रिटायरमेंट तक महँगाई के साथ बढ़ता है। रिटायरमेंट पर ज़रूरी फ़ंड को ये ख़र्च, जो महँगाई के साथ बढ़ते रहेंगे, आपकी योजना वाली उम्र तक चुकाने होंगे, जबकि बाक़ी पैसा रिटायरमेंट के बाद के रिटर्न पर निवेशित रहेगा।
मासिक बचत वह रक़म है जो आपकी अब तक की बचत के साथ मिलकर रिटायरमेंट की उम्र तक उस फ़ंड तक पहुँचती है। स्टेप-अप के साथ आप कम से शुरू करते हैं और हर साल रक़म बढ़ाते हैं।
FIRE (वित्तीय आज़ादी, जल्दी रिटायरमेंट) में अक्सर साल के ख़र्च का 25 गुना लिया जाता है (अमेरिकी अध्ययनों का 4% नियम)। भारत में महँगाई ज़्यादा होने से कई प्लानर भारत के लिए 30–33 गुना सुझाते हैं।आम रिटर्न
- PPF: 7.1% (जुलाई–सितंबर 2026), टैक्स-फ़्री, 15 साल का लॉक-इन, साल में ₹1.5 लाख तक।
- EPF: 2025-26 के लिए 8.25%, आपकी सैलरी और नियोक्ता के हिस्से से।
- NPS: बाज़ार से जुड़ा; इक्विटी और बॉन्ड के मिक्स ने साल में लगभग 9–11% रिटर्न दिया है।
- इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड: लंबे समय में लगभग 11–12%, बीच में घाटे वाले साल भी आते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह वित्तीय सलाह है?
नहीं। यह योजना के लिए अनुमान है। रिटर्न की गारंटी नहीं है; SEBI में रजिस्टर्ड सलाहकार आपकी पूरी स्थिति देखकर योजना बना सकता है।
इलाज के ख़र्च का क्या?
इलाज का ख़र्च आम तौर पर सामान्य महँगाई से तेज़ी से बढ़ता है। अलग से हेल्थ इंश्योरेंस रखें और मासिक ख़र्च में कुछ गुंजाइश जोड़ें।