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रेकरिंग डिपॉज़िट कैलकुलेटर

हर तिमाही चक्रवृद्धि ब्याज के साथ बैंक RD की मैच्योरिटी वैल्यू, जैसे ज़्यादातर भारतीय बैंक निकालते हैं।

सालाना ब्याज बैंक की सीमा पार करे तो TDS कटता है; यहाँ टैक्स से पहले की मैच्योरिटी दिखाई गई है।

RD का ब्याज कैसे निकाला जाता है

ज़्यादातर भारतीय बैंक RD के ब्याज में हर तिमाही चक्रवृद्धि करते हैं। हर मासिक जमा को उतने समय का ब्याज मिलता है जितना वह खाते में रहती है, इसलिए पहली जमा पर सबसे ज़्यादा और आख़िरी पर सबसे कम ब्याज मिलता है। कैलकुलेटर हर किस्त को इस तरह जोड़ता है:

P × (1 + r ÷ 400)बाक़ी महीने ÷ 3

जहाँ P मासिक जमा है और r प्रतिशत में सालाना दर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या RD के ब्याज पर टैक्स लगता है?

हाँ। यह आपकी आमदनी में जुड़ता है और आपके स्लैब की दर पर टैक्स लगता है। ब्याज सालाना सीमा पार करते ही बैंक TDS काटते हैं।

अगर कोई किस्त छूट जाए तो?

बैंक आम तौर पर हर छूटे महीने पर छोटी पेनल्टी लेते हैं, और कुछ बैंक कई किस्तें छूटने पर RD बंद कर देते हैं। अपने बैंक की शर्तें देखें।

क्या पोस्ट ऑफ़िस RD भी ऐसे ही निकाला जाता है?

हाँ, इंडिया पोस्ट के RD में भी तिमाही चक्रवृद्धि होती है। दर हर तिमाही सरकार तय करती है।

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